उन्होंने उन्होंने ग्रामीण प्रबंधन में एमबीए (स्नातकोत्तर डिप्लोमा) और वाणिज्य में स्नातक किया है, और एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और जलग्रहण क्षेत्र पुनर्स्थापन पर पाठ्यक्रम भी किया है। श्री वीरेन ने देश भर में बड़े पैमाने पर यात्राएँ की हैं और उन्हें विविध क्षेत्रों में काम करने का लगभग 40 वर्षों का अनुभव है, जिनमें समुदाय-आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पारिस्थितिकी, जल संसाधन प्रबंधन, जलग्रहण क्षेत्र विकास, बंजर भूमि विकास, साझा वन प्रबंधन और चारागाह विकास, आजीविका और विकेंद्रीकृत शासन, जलवायु लचीलापन और सतत विकास, सामुदायिक जागरूकता, सरकारी कर्मियों का प्रशिक्षण, समुदाय आधारित संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के लिए प्रशिक्षण, महिलाओं और बच्चों सहित स्थानीय समुदायों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण इत्यादि हैं। श्री वीरेन परियोजना अभिकल्पन, क्षमता संवर्धन, परियोजना प्रबंधन, निगरानी और मूल्यांकन, क्रियात्मक अनुसंधान, प्रक्रिया दस्तावेजीकरण, नीति वकालत और संपर्क जाल बनाने में अत्यधिक अनुभवी हैं। उनके द्वारा मुद्रित और इलेक्ट्रॉनिक रूप में तैयार किया गया दस्तावेज़ीकरण, विषयगत रिपोर्ट, दस्तावेज पत्र, मूल्यांकन और आंकलन आदि का विशाल संचय है। वह प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीव, आजीविका, शासन आदि से संबंधित विषयों में देश के विभिन्न संस्थानों के छात्रों के अकादमिक पर्यवेक्षक भी हैं।
अपने 'नागरिक विज्ञान' परिप्रेक्ष्य के माध्यम से श्री वीरेन महिलाओं और बच्चों सहित आम जन के बीच उनके प्राकृतिक संसाधनों और संरक्षण में भूमिका के प्रति वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने में लगे हुए हैं।