उप-विषयों

    पानी में बैक्टीरिया (ई. कोली) संदूषण


  • ई. कोली एक प्रकार का मलीय कोलीफ़ॉर्म बैक्टीरिया है जो आमतौर पर मनुष्यों और अन्य गर्म रक्त वाले जानवरों की बड़ी आंत में पाया जाता है। सतही और भू-जल के किसी भी रूप में कोली फॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति इस बात का प्रबल संकेत है कि यह मनुष्यों और/या जानवरों के मलजल या मल से दूषित है। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया दूषित पानी या भोजन, कच्चे मांस, कच्ची या दूषित सब्जियों आदि के माध्यम से मनुष्यों में संचारित होते हैं। अंतर्ग्रहण के बाद वे गंभीर स्वास्थ्य खतरे जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, खूनी दस्त, अथवा अति गंभीर स्वास्थ्य खतरे जैसे गुर्दे क्रियाशील न रहना, रक्त में बिम्बाणुओं (प्लेटलेट्स) की कमी, मस्तिष्क का दौरा और सम्मूर्छा (कोमा) आदि कारित कर सकते हैं। पानी और भोजन को 70°C या इससे ऊपर के तापमान पर गर्म करने पर कोलीफॉर्म बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति व्यक्त करने की इकाई ‘अधिकतम संभावित संख्या (Most Probable Number / MPN) प्रति 100 मिलीलीटर (एमपीएन/100 मि.ली.) है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मानक पीने के पानी में ई. कोली की शून्य संख्या निर्दिष्ट करता है। भारत का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मण्डल (CPCB) पीने के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की स्वीकार्य सीमा 50 एमपीएन/100 मिलीलीटर या उससे कम निर्धारित करता है।

    पानी में कोलीफॉर्म की संख्या का गुणात्मक और मात्रात्मक अनुमान लगाने की अलग-अलग विधियाँ हैं। इसकी उपस्थिति का पता लगाने के लिए सबसे सरल और त्वरित तरीका ‘शीशी में जीवाणु वृद्धि परीक्षण’ (Vial Culture Test) है जिसमें नमूना पानी को शरीर के तापमान (लगभग 36 डिग्री सेल्सियस) पर 24 घंटे के लिए एक शीशी में पहले से रखे गए वृद्धि मीडिया के साथ संवर्धित किया जाता है। पानी में मटमैले गुलाबी/लाल रंग के दिखने और उसके गहरे होने से यह अंदाजा हो जाता है  कि इसमें कोलीफॉर्म का संदूषण कितना गंभीर है।

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