प्रयोग विवरण

मछली के शल्क, उनकी वृद्धि और पर्यावरणीय स्थितियों की पहचान के रूप में


इस गतिविधि के बारे में


मछली का शल्क एक छोटी कठोर प्लेट होती है जो मछली की त्वचा के मध्यजनस्तर (मीसोडर्म) (अधिचर्म और अंतर्निहित ऊतकों के बीच की परत) से विकसित होती है। शल्क मुख्य रूप से मछली के शरीर की सुरक्षा के लिए होते हैं और इसके अलावा शल्क उन्हें पानी में छलावरण और गतिविधियों में भी मदद करते हैं। मछली पर शल्क एक के ऊपर एक प्लेटों में इस स्वरूप में बढ़ते हैं कि शल्क का मुक्त सिरा पूंछ की ओर इंगित करता है।

                       

मछली के शल्कों को चार प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है - प्लेकॉइड, गैनॉइड, साइक्लोइड और टेनॉइड। प्लेकॉइड शल्क आकार में नहीं बढ़ते हैं, लेकिन जैसे-जैसे मछली का आकार बढ़ता है, उनकी संख्या बढ़ती जाती है। गैनॉइड शल्क मछली की उम्र बढ़ने के साथ आकार में बढ़ते जाते हैं। साइक्लोइड शल्कों का आकार मछली की उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है और यह शल्क में बने छल्लों के रूप में दिखाई देता है। टेनॉइड शल्कों का आकार भी जैसे-जैसे मछली बढ़ती है,बढ़ता जाता है और उनकी वृद्धि शल्क पर वलयों के रूप में प्रकट होती है। शल्क में बने वृद्धि वलयों का स्वरूप उन पर्यावरणीय परिस्थितियों को भी प्रकट करता है जिनमें मछली बढ़ती है।

 

 

शल्क की संरचना मछली समूहों के व्यापक वर्गीकरण में उपयोगी है। प्लेकॉइड शल्क उपास्थि (हड्डियों के बजाय एक कठोर लचीला ऊतक) वाली मछलियों की विशेषता है, गैनॉइड शल्क प्राचीन अस्थिल मछलियों में पाए जाते हैं, जबकि साइक्लोइड और टेनॉइड शल्क उच्च वर्ग की अस्थिल मछलियों की विशेषताएं हैं जो वर्तमान में अधिकतर पाई जाती हैं।

यहां हम उस गतिविधि पर चर्चा करने जा रहे हैं जिसके माध्यम से हम मछली शल्कों की बनावट और उनमें बने वृद्धि वलयों की जांच कर सकते हैं और मछलियों की आयु और वृद्धि के साथ-साथ उनके आवास में विद्यमान पर्यावरणीय स्थितियों का भी अनुमान लगाने का प्रयास कर सकते हैं।

आवश्यक सामग्री


● मछली शल्क पत्रक,

 ● कांच की स्लाइड,

● सेलो टेप,

● अंकित करने के लिए स्टिकर,

● मार्कर,

● चिमटी

● वाच ग्लास,

● टिशू पेपर

तरीका


A. मछली के शल्कों का एकत्रीकरण और स्लाइड बनाने की तैयारी:

  1. आमतौर पर कोई भी व्यक्ति स्थानीय बाजार से मछली की शल्कें एकत्रित  कर सकता है। बेहतर शल्क के नमूने के लिए मछली के शरीर के पार्श्व उदर  वाले हिस्से का चयन करें और चिमटी की सहायता से शल्क को निकाल लें। शल्क की विशेषताओं के बेहतर अध्ययन और अवलोकन के लिए कम से कम 2-3 शल्क लें।

 

                                 

  1. शल्क को 2-3 बार पानी से धोएं ताकि शल्क पर चिपका हुआ श्लेष्मा (मयुकस) हट जाए।
  2. कांच की स्लाइड लें और उसे टिश्यू पेपर की मदद से साफ करें
  3. मछली के शल्क को कांच की स्लाइड पर क्षैतिज स्थिति में रखें और इसे दूसरी कांच की स्लाइड से ढक दें।
  4. स्लाइडों के सिरों को सेलो टेप से लपेटें ताकि स्लाइडों के बीच शल्क ठीक से जम जाए
  5. स्लाइड पर दिनांक, समय और स्थान अंकित करें

ध्यान दें - स्लाइड की तैयारी नमूना संग्रह स्थल पर (अर्थात बाजार की दुकान पर या जलाशय आदि पर) की जा सकती है। यदि आपको किसी प्राकृतिक स्थल पर हाल ही में मरी हुई कोई मछली मिलती है, तो आप उसी तरह शल्क का नमूना एकत्र कर सकते हैं।

B. शल्क के वलय की गणना द्वारा मछली की आयु का निर्धारण:

  1. आयु निर्धारण के लिए, पृष्ठीय पंख की उत्पत्ति के ठीक नीचे शरीर के किनारे से कुछ शल्क हटा लिए जाते हैं। नरम पंख अरों वाली मछलियों में शल्कों को पार्श्व रेखा के ऊपर के क्षेत्र से लिया जाता है, लेकिन काँटेदार पंख अरों वाली मछलियों में पार्श्व रेखा से नीचे के क्षेत्र के शल्कों को लिया जाता है।
  2. शल्कों को पहले कास्टिक सोडा के तनु घोल में 10-15 मिनट के लिए भिगोया जाता है। इसके बाद, उन्हें धोया जाता है और माउंट (निरिक्षण के लिए लगाना) किया जाता है।
  3. आयु निर्धारण के लिए अस्थायी एवं स्थायी माउंट तैयार किये जा सकते हैं।
  4. साफ किए गए शल्क के अस्थायी माउंट को गीला या सूखा बनाया जाता है। माउंट तब सबसे अच्छे होते हैं जब शल्क को पूरी तरह से सपाट बनाने के लिए कुछ समय के लिए दो स्लाइडों के बीच रखा जाता है।
  5. गीली प्रक्रिया में शल्क को ग्लिसरीन में माउंट किया जाता है।

पेड़ के तने की तरह मछली के शल्क में भी वार्षिक वृद्धि के वलय होते हैं और वलय का निर्माण भी पर्यावरणीय परिस्थितियों को इंगित करता है। उदाहरण के लिए, शल्क में बहुत पास-पास वलय सर्दियों की अवधि में धीमी वृद्धि का उसी तरह संकेत देते हैं, जिस प्रकार पेड़ के तने में वलय दिखाई देते हैं।

 


 

 

विशेष - मछली के शल्क की जांच उम्र और वृद्धि देखने के लिए, परिपक्वता, आयु-संबंधित विकास दर, उत्तरजीविता/मृत्यु दर (दीर्घायु), जनसंख्या आयु संरचना आदि के रिकॉर्ड निर्धारित करने और तैयार करने के लिए भी की जा सकती है।

डेटा संग्रह और विश्लेषण


1. शल्क द्वारा मछली की आयु का निर्धारण – 

जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है, मछली की उम्र निर्धारित करने के लिए, शल्क में बने वलय की सावधानीपूर्वक जांच करें और पहचानें -

(ख). शल्क का प्रकार और वार्षिक वलय की गिनती का रिकॉर्ड – 

शल्कों के प्रकार और उनमें बनने वाले वार्षिक वलय की संख्या को रिकॉर्ड करने के लिए एक आंकड़ा तालिका तैयार की जा सकती है। यहां आंकड़ा तालिका का उदाहरण दिया गया है –

परिणाम


● मछलियों की विविधता, प्रजातियों की सूची, शल्कों के प्रकार, वार्षिक वलयों की गणना और आयु, तथा फोटो या रेखाचित्रों का एक सामान्य विवरण तैयार करके प्रस्तुत किया जा सकता है।

● आप गणितीय और सांख्यिकीय गणनाओं के माध्यम से अनुमान लगा सकते हैं और उसके अनुसार अपने आँकड़े प्रस्तुत कर सकते हैं।

● मछलियों, उनके शल्कों का स्वरूप, शल्क संरचना, वार्षिक वलय स्वरूप इत्यादि के फोटो या हस्तनिर्मित रेखाचित्र प्रभावी बन सकते हैं।

सीखे गए मुख्य बिंदु


● मछली आकारिकी 

● शल्क रचना 

● शल्क वार्षिक वृद्धि वलय गणना और मछली की आयु निर्धारण

● शल्क वार्षिक वृद्धि वलयों के स्वरूप की जांच से तनाव स्थितियों का अनुमान

● विभिन्न तरीकों से मछलियों के वर्गीकरण के लिए शल्कों का अध्ययन

खुले प्रश्नन्लेषण


● क्या सभी मछलियों में शल्क होते हैं? बिना शल्क वाली मछलियाँ कैसे जीवित रहना और गतिविधियां कर पाती हैं?

● मछली पकाने से पहले उसके शल्क क्यों हटा दिए जाते हैं?

रोचक तथ्य


शल्कों का उपयोग: मछली के शल्कों का उपयोग आभूषण जैसी विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को बनाने के लिए किया जा सकता है। मछली के शल्कों से तैयार आभूषणों के कुछ उदाहरण यहां दिखाए गए हैं -