प्रयोग विवरण

विषय :- मिट्टी

उप विषय :- मिट्टी के रंग

रंगों के आधार पर मिट्टी के प्रकार का निर्धारण


इस गतिविधि के बारे में


  • मिट्टी का रंग मिट्टी की अंतर्वस्तुओं, संगठन, कार्यों और भौतिक-रासायनिक विशेषताओं के अवलोकन का एक संकेतक है। मिट्टी को वर्गीकृत करने की सबसे सरल विधि उनके रंगों के आधार पर है। यह प्रयोग विभिन्न रंगों के आधार पर किसी क्षेत्र की मिट्टी को समझने और अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी के रंग बनाने वाले खनिजों की उपस्थिति को समझने पर केंद्रित है।

आवश्यक सामग्री


 ● खुरपी,

● मिट्टी रंग आरेख

(मिट्टी के रंग आरेख का एक उदाहरण यहाँ दिया गया है, आप इसका उपयोग मिट्टी के नमूनों के रंगों की तुलना करने के लिए कर सकते है। आप और अधिक ज्ञात मिट्टी के रंगों का आरेख स्वयं भी तैयार कर सकते हैं

 

                                               

चित्र: मिट्टी रंग आरेख     

तरीका


  1. एक जगह से अलग-अलग गहराइयों (मिट्टी के अलग-अलग संस्तरों) से थोड़ी थोड़ी मात्रा में या अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने एकत्रित करें, 
  2. यदि नमूना सूखा है, तो इसे पानी से थोड़ा गीला कर लें, 
  3. प्रत्येक नमूने का रंग और नमूना स्थल की अन्य जानकारी रिकार्ड करें 

नोट: कभी-कभी, मिट्टी के नमूने में एक से अधिक रंग हो सकते हैं। यदि आवश्यक हो तो अधिकतम दो रंग रिकॉर्ड करें, और (1) मुख्य (ज्यादा प्रभावी) रंग और (2) अन्य (कम प्रभावी) रंग इंगित करें।

संदर्भ के लिए मिट्टी के रंगों की कुछ श्रेणियों का वर्णन यहाँ किया गया है –
 

काली मिट्टी

ये मिट्टी अक्सर उच्च स्तर के कार्बनिक पदार्थ (peats) से युक्त होती है जो मिट्टी को अपना रंग देते हैं। ऐसी मिट्टी का पीएच कम होता है और इनमें जल निकासी बहुत कम होती है (पानी का भूमिगत रिसाव अधिक नहीं होने देती) और इसलिए इनके ऊपर अधिकतर जलभराव की स्थिति दिखाई देती है।

सफेद/पीली/प्रक्षालित मिट्टी

इन मिट्टी को अक्सर प्रक्षालित या 'धुली हुई' कहा जाता है। अधिक मात्रा में वर्षा या भारी जल निकासी के कारण लोहे और मैंगनीज जैसे पोषक तत्वों के निक्षालित होने के कारण ये मिट्टी हल्के रंग का प्रदर्शन करती है। इसमें जैविक सामग्री की मात्रा कम और निक्षालित पोषक तत्व पाए जाते हैं।

लाल मिट्टी

लाल रंग की मिट्टी अच्छे जल निकास का संकेत देती है। लाल रंग मिट्टी के भीतर ऑक्सीजन युक्त परिस्थितियों में लौह तत्व के ऑक्सीकरण के कारण होता है। इससे मिट्टी में लौह जंग जैसा रंग विकसित हो जाता है। कार्बनिक पदार्थ की मात्रा से इसका रंग गहरा हो सकता है। यह मिट्टी फास्फोरस, लौह और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध होती है और कृषि के लिए उपजाऊ और अच्छी मानी जाती है।

पीली से पीली-भूरी: 

इन मिट्टी का ‘ए’ संस्तर पतला होता है और कम पीएच तथा ऑक्साइड्स की कम मात्रा इसका गुणधर्म होता है। इन मिट्टी में सिलिका की तुलना में एल्यूमीनियम और लोहा अधिक होता है। इन मिट्टी में लौह यौगिक जलतृप्त रूप में होते हैं और इसलिए जंग जैसा रंग पैदा करने के बजाय पीले या पीले-भूरे रंग का प्रदर्शन करते हैं। इन मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व कम होते हैं, इसलिए ये बहुत उपजाऊ नहीं होती हैं।

भूरी मिट्टी: 

इन मिट्टी में आयरन ऑक्साइड और सिलिका जैसे खनिजों के साथ-साथ अच्छी मात्रा में सड़े-गले कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं। भूरे रंग का गहरापन और इसी प्रकार उर्वरता भी कार्बनिक पदार्थ की मात्रा और पानी की निकासी के अनुसार बदलते रहते हैं।

चिकनी /भूरी /हरी मिट्टी: 

ये मिट्टी जल भराव या खराब जल निकासी वाली होती है। इन मिट्टी में लंबे समय तक जलभराव और हवा की कमी से लौह और मैंगनीज यौगिकों के अपचयित होने की स्थिति बनती है (जो मिट्टी के रंग के लिए जिम्मेदार है)। इसमें लौह और मैंगनीज यौगिक या तो मिट्टी से निकल जाते हैं या मिट्टी में धब्बे या ठोस डलों के रूप में अलग हो जाते हैं।

मिट्टी के रंग की श्रेणियों का एक नमूना चार्ट यहां दिया गया है –

डेटा संग्रह और विश्लेषण


● प्रत्येक नमूने के लिए मिट्टी का रंग और अन्य विवरण जैसे स्थान (अक्षांश और देशांतर), तिथि और समय, भूमि उपयोग का प्रकार आदि रिकॉर्ड करें।

● यदि आपको मिट्टी का नया रंग मिलता है, तो आप अवलोकन को रिकॉर्ड करने के लिए अपनी खुद की मिट्टी के रंग की श्रेणी बना सकते हैं (उस रंगीन मिट्टी के बारे में अधिक जानने के लिए संदर्भ सामग्री और वेब संसाधनों के माध्यम से अपनी खोज जारी रखें)।

● आंकड़ों के संकलन और सारणीबद्ध करने के लिए उदाहरण के तौर पर एक नमूना तालिका यहां दी गई है, आप तदनुसार अपनी तालिका बना सकते हैं।

परिणाम


● आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि संदर्भित क्षेत्र में कितने प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। उनकी बाह्य विशेषताओं एवं परिस्थितियों को समझा जा सकता है।  

● बुनियादी आँकड़े प्राप्त करने के बाद आप उचित परिणाम और निष्कर्ष निकलने के लिए गणितीय और सांख्यिकीय गणना कर सकते हैं। 

सीखे गए मुख्य बिंदु


● रंग और संबधित विशेषताओ के आधार पर मिट्टी की पहचान। 

● मिट्टी के नमूना लेने, संग्रह करने, अवलोकन करने, तुलना करने, रंग के आधार पर मानकों से संदर्भित करने का कौशल जो वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए आवश्यक हैं ।

खुले प्रश्नन्लेषण


● घरों, महलों और अन्य वस्तुओं पर अलग-अलग रंग की मिट्टी से लिपाई और रंगाई करने का चलन प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। यहां तक कि कई आदिवासी समुदायों में रंग की समझ बहुत उत्कृष्ट है। वे लोग मिट्टी का उपयोग करके स्थायी रंग कैसे तैयार कर पाए?

रोचक तथ्य


मुन्सेल रंग प्रणाली

यह रंग योजना के आधार पर मिट्टी के रंगों को नामित करने की एक विधि है। यह प्रणाली मिट्टी के तीन प्रमुख गुणों अथवा विशेषताओं अर्थात् ‘मूल रंग (Hue), रंग की गहराई (Value) और रंग तीव्रता (chroma) पर आधारित है:

  1. ‘मूल रंग (Hue) – यह प्रमुख रंगों की तरंग दैर्ध्य के अनुरूप, जैसे लाल, नारंगी, पीला इत्यादि होता है। 
  2. रंग की गहराई (Value)  – यह किसी रंग की चमक (हल्कापन या गहरापन) के अनुरूप होता है। 
  3. रंग तीव्रता (chroma) – यह किसी रंग की तीव्रता या संतृप्ति के अनुसार होता है। 

मुन्सेल रंग प्रणाली के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप वेबसाइट https://munseII.com देख सकते हैं।

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