प्रयोग विवरण

आइए एक जलजीवशाला के माध्यम से जलीय जीवन को देखें और समझें


इस गतिविधि के बारे में


एक जलजीवशाला एक जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में काम कर सकता है जिसमें रखे गए जलीय पादप और जंतु अनुकूल परिस्थितियों में आराम से रहते हैं और यहां तक कि वे उसमें प्रजनन, जीवन चक्र गतिविधियाँ  और अंतःक्रियाओं  को निष्पादित कर सकते हैं। एक जलजीवशाला के माध्यम से कोई भी व्यक्ति आसानी से देख सकता है कि विभिन्न जलीय जीव अपने सूक्ष्म आवास की प्राथमिकता के अनुसार पानी के विभिन्न क्षेत्रों में कैसे वितरित होते हैं, वे वांछित अवधि के लिए विभिन्न गतिविधियों में अपने शरीर के अंगों, अपनी अनुकूलन विशेषताओं, व्यवहार आदि का उपयोग कैसे करते हैं।

यहां एक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में एक जलजीवशाला के उदाहरण से हम इसके घटकों को समझ सकते हैं जिनमें उत्पादक, उपभोक्ता, उनकी अन्तः क्रियाएं, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, ऊर्जा हस्तांतरण, पोषण संरचना, जैवभूरासायनिक चक्र आदि शामिल हैं जो एक पारिस्थितिकी तंत्र के विशिष्ट लक्षण हैं।

उपलब्ध जगह और प्रबंधन करने की क्षमता के अनुसार हम एक क्यूबिक फीट से लेकर कई क्यूबिक मीटर या उससे भी अधिक बड़ा और किसी भी आकार का एक जलजीवशाला बना सकते हैं।

आवश्यक सामग्री


● आप निश्चित आकार के कांचों को आपस में जोड़कर (चिपकाकर) जलजीवशाला बना सकते हैं। वैकल्पिक रूप से आप बाजार में तैयार जलजीवशाला भी ला सकते हैं। आप घर पर उपलब्ध कांच के पात्र का उपयोग करके एक छोटा जलजीवशाला बना सकते हैं। आप कोई भी बक्से जैसा पात्र भी ले सकते हैं जिसका कम से कम एक तरफ का हिस्सा पारदर्शी होना चाहिए।

तरीका


  1. एक जलजीवशाला लें और उसके ऊपरी खुले हिस्से को जालीदार कपड़े या मच्छरदानी जैसी पतली जाली से ढक दें ताकि आप आवश्यकता पड़ने पर इसे खोल सकें।
  2. जलजीवशाला के तल पर कुछ बजरी और मोटी रेत बिछा दें।
  3. जलजीवशाला में सामान्य पानी भरें (बेहतर होगा कि इसे किसी नदी या तालाब या झील से इकट्ठा किया जाए और यदि उपलब्ध नहीं है तो नल का पानी भी चलेगा), इसे कुछ घंटों के लिए छोड़ दें ताकि पानी में निलंबित कण नीचे बैठ जाएं।
  4. जलजीवशाला के निचले हिस्से में कुछ जलीय पौधे लगाएं (यदि स्वतंत्र रूप से तैरने वाले जलीय पौधे उपलब्ध हों तो आप उन्हें भी दाल सकते हैं)।
  5. जलजीवशाला में जलीय जीवों को सावधानी से छोड़ें।
  6. वांछित अवधि तक जलीय जंतुओं का निरीक्षण करें और अवलोकनों को रिकॉर्ड करें।

डेटा संग्रह और विश्लेषण


आंकड़ों का संग्रहण और विश्लेषण

● अवलोकन के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ो को सारणीबद्ध रूप में या विवरण रूप में दर्ज किया जा सकता है।

● आंकड़ों का विश्लेषण मात्रात्मक और/या गुणात्मक रूप से या किसी विशेष जीव या जीवों के विभिन्न वर्गों के सन्दर्भ में या समग्र रूप से वर्णनात्मक रूप में किया जा सकता है।

● आप जीवों के विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों और जलजीवशाला (जलीय) पारिस्थितिकी तंत्र की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं।

 

परिणाम


● अपने आँकड़े/अवलोकन प्रजातियों की विविधता, सूक्ष्म आवास आवश्यकताओं, व्यवहार, कार्यों आदि के संदर्भ में गणना या गुणात्मक विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत करें।

सीखे गए मुख्य बिंदु


● एक अच्छी तरह से प्रबंधित जलजीवशाला से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को समझना।

● विभिन्न जलीय जीवों का वितरण, क्षेत्र निर्धारण, आहार स्वरूप और अन्य गतिविधियाँ प्रजाति-वार और व्यक्तिगत रूप से भिन्न-भिन्न होती हैं।

● जलीय पर्यावरण में रहने के लिए जलीय जीवों की आकारिकी और अनुकूलन अलग-अलग होते हैं।

खुले प्रश्नन्लेषण


● क्या आप समुद्री मछलियों को जलजीवशाला में रख सकते हैं? उसके लिए आपको किस प्रकार की परिस्थितियां बनानी होंगी?

● मछलियाँ प्रजनन में क्या देती हैं - अंडे या बच्चे ? क्या आप तदनुसार अपने क्षेत्र में मछलियों की पहचान कर सकते हैं?

● मछलियाँ अपने बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण कैसे करती हैं? देखें और वर्णन करें.

रोचक तथ्य


‘मैराइन वर्ल्ड’ - भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक जलजीवशाला:

भारत का सबसे बड़ा समुद्री जलजीवशाला 'मैराइन वर्ल्ड'  21 अगस्त, 2023 को केरल राज्य के त्रिशूर जिले के चावक्कड़ में पंचवड़ी सागर के तट पर खोला गया था। समुद्री जलजीवशाला में समुद्री जीवन की 300 से अधिक प्रजातियों की 3 लाख से अधिक मछलियाँ हैं। सबसे बड़ा सार्वजनिक जलजीवशाला चार एकड़ भूमि पर फैला हुआ है, जिसमें आम तौर पर एक समय में 150 से अधिक आगंतुक और छुट्टियों के दौरान 2000 से अधिक लोग आ सकते हैं।

कीवर्ड