प्रयोग विवरण

वायु दिग्दर्शक एवं वायुवेगमापी का उपयोग करके हवा की गति और हवा की दिशा का निर्धारण


इस गतिविधि के बारे में


हवाएँ अपने बल और परिमाण के आधार पर जीवित और निर्जीव घटकों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक हैं। हवाएं पराग, बीज, नमी, गर्मी, कणों, गैसों आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हवाएँ दैनिक भिन्नताएँ (अर्थात दैनिक अवधि में परिवर्तनशील स्वरूप) दिखा सकती हैं और साथ ही उनका एक विशिष्ट दीर्घकालिक स्वरूप भी हो सकता है। हवाएँ महत्वपूर्ण मौसम मापदंडों में से एक हैं जो कृषि, विमानन, समुद्री और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में दिशा ज्ञान, नौकायन और मौसम विज्ञान आदि जैसे क्षेत्रों में महत्व रखती हैं।

किसी क्षेत्र की हवा की दिशा और गति का अध्ययन, वैज्ञानिक अनुसंधान, निगरानी, भविष्यवाणी, नियोजन, शहरी क्षेत्रों और उद्योगों के विकास में, कृषि और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन आदि में मदद करता है।

हवा की गति और हवा की दिशा हवाओं के प्राथमिक गुणधर्म हैं जिन्हें कोई भी सरल और आसान अवलोकन के माध्यम से आसानी से समझ सकता है। वायु दिग्दर्शक किसी विशेष समय अवधि के लिए हवा की दिशा दर्ज करने के लिए एक उपयोगी उपकरण है। हवा की गति को मापने के लिए प्याला वायुवेगमापी सबसे सरल उपकरण है जिसका उपयोग हवा की गति की निगरानी और गणना करने के लिए किया जाता है। वायु दिग्दर्शक और वायुवेगमापी दोनों को एक ही स्थान पर एक साथ स्थापित किया जा सकता है। आदर्श स्थिति में हवा का माप लेने के लिए स्थान खुले होने चाहिए; पेड़ों, इमारतों और अन्य संरचनाओं से दूर होने चाहिए, नहीं तो ये प्राकृतिक हवा की गति में बाधा डाल सकते हैं। यदि स्थान पेड़ों या इमारतों से घिरा हुआ है, तो उपकरण को किसी इमारत के ऊपर रखें जो उस पेड़ या संरचना से पर्याप्त दूर हो जिस पर इसे रखा गया है।

आवश्यक सामग्री


● वायु दिग्दर्शक और वायुवेगमापी 

● दिशासूचक यंत्र

                                                                                                                     

तरीका


वायु दिग्दर्शक और वायुवेगमापी को एक ही स्थान पर स्थापित किया जा सकता है। दिशा दर्ज करने के लिए, साथ में एक दिशासूचक यंत्र रखा जाता है।

हवा की दिशा के लिए:

  1. वायु दिग्दर्शक का निरीक्षण करें, इसका तीर वाला हिस्सा उस दिशा को इंगित करेगा जिस दिशा से हवा चल रही है। यदि तीर पूर्व की ओर इंगित कर रहा है, तो इसका मतलब है कि हवा पूर्व से आ रही है। 
  2. अवलोकन की आवश्यक अवधि के लिए वायु दिग्दर्शक की निगरानी करें और उन दिशाओं को दर्ज करें जिनमें प्रेक्षण अवधि के दौरान हवाएं बहती हैं।
  3. हवा की दिशा सामान्यतः आठ दिशाओं, पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, उत्तर पूर्व, उत्तर पश्चिम, दक्षिण पूर्व, दक्षिण पश्चिम में देखी जाती है। अधिक स्पष्ट प्रेक्षण के लिए दिशाओं को और उप-विभाजित किया जा सकता है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है -

                                                                                                      

 

हवा की गति के लिए:

  1. प्याला वायुवेगमापी में एक प्याले को अन्य प्यालों से भिन्न रंग (उदाहरण के लिए लाल) से चिह्नित करें या रंगें।
  2. अलग रंग/चिह्न वाला प्याला एक समयावधि में अपने ऊर्ध्वाधर शाफ्ट पर कितनी बार घूमता है, इसकी गणना करें।
  3. प्याले द्वारा अपनी धुरी के चारों ओर तय की गई दूरी इस प्रकार मापें - प्याले द्वारा एक चक्कर में तय की गई दूरी (यह वृत्ताकार पथ की परिधि जैसी होगी), 

= भुजा x 2 π,  

यानि, भुजा X 2 X 3.14 (जहां 'भुजा' शाफ्ट के केंद्र से प्याले के केंद्र की दूरी है जिससे यह एक क्षैतिज भुजा से जुड़ा हुआ है) 

  1. एक निश्चित अवधि में चिह्नित प्याले द्वारा किए गए चक्करों को दर्ज करें
  2. समय को मिनट या घंटे में और दूरी को मीटर या किलोमीटर में बदलें
  3. हवा की गति का उल्लेख मीटर प्रति सेकंड या किलोमीटर प्रति घंटा या इसी प्रकार करें
  4. उदाहरण के लिए, यदि कप 10 सेकंड में 30 चक्कर लगाता है तो यह प्रति मिनट 180 चक्कर लगाएगा या एक घंटे में 10800 चक्कर लगाएगा।

डेटा संग्रह और विश्लेषण


आप निश्चित अवधि के लिए हवा की दिशा दर्ज करने के लिए एक प्रेक्षण तालिका बना सकते हैं, और उसी प्रकार हवा का वेग सम्बन्धित प्रेक्षण दर्ज करने के लिए प्रेक्षण तालिका बना सकते हैं। उदाहरण के लिए के लिए आंकड़ों के उदाहरणों के साथ तालिकाओं के नमूने यहां दिखाए गए हैं –

एक दिन में विभिन्न समय पर दर्ज की गई हवा की दिशाओं को दर्ज हेतु तालिका –

 

एक दिन में विभिन्न अवधियों के लिए दर्ज की गई हवा के वेग को दर्शाने हेतु तालिका -

 

प्याले द्वारा अपनी धुरी के चारों ओर तय की गई दूरी इस प्रकार मापें 

  1. प्याले द्वारा एक चक्कर में तय की गई दूरी = भुजा x 2 π,  यानि, भुजा X 2 X 3.14 (जहां 'भुजा' शाफ्ट के केंद्र से प्याले के केंद्र की दूरी है जिससे यह एक क्षैतिज भुजा से जुड़ा हुआ है)
  2.  माना भुजा 10 सेंटीमीटर है, तो एक चक्कर में उसके द्वारा तय की गई दूरी = 10 X 2 X 3.14, यानी 62.8 सेमी या 0.628 मीटर। 
  3. अब यदि प्याला 10 सेकंड में 30 चक्कर लगाता है तो यह प्रति मिनट 180 चक्कर लगाएगा या एक घंटे में 10800 चक्कर लगाएगा  इसलिए एक घंटे में तय की गई दूरी = 

0.628 मीटर X 10800 = 6782.4 मीटर या (6782.4/1000) लगभग 6.8 किमी होगी, 

और वायु वेग (6782.4/60*60), लगभग1.9 मीटर/सेकंड या लगभग 6.8 किमी/घंटा  में व्यक्त किया जायेगा।

  1. खुद से गणना कीजिये, यदि वायुवेगमापी 10 सेकण्ड में 18 बार घूमता है।

परिणाम


● हवा की गति और हवा की दिशा को विभिन्न विश्लेषणों और व्याख्याओं के माध्यम से मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों रूप से वर्णित किया जा सकता है।

सीखे गए मुख्य बिंदु


● हवा की गति और हवा की दिशा हमेशा बदलती रहने वाली घटना है जो अन्य मौसम की घटनाओं के साथ-साथ हमारे जीवन को भी महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं।

● वायु दिग्दर्शक और वायुवेगमापी को बनाना आसान है और ये आसानी से इधर उधर ले जा  सकने वाले उपकरण हैं जिन्हें अल्पकाल या दीर्घकाल के लिए हवा की निगरानी के लिए उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जा सकता है। 

● किसी क्षेत्र की जलवायु विशेषताओं की व्याख्या करने में हवा की गति और हवा की दिशा के दीर्घकालिक आंकड़ों का उपयोग किया जाता है।

● एक दशक या उससे अधिक समय के आंकड़ों का अध्ययन हमें क्षेत्र में हवा के प्रवाह और पारिस्थितिकी और समाज पर इसके प्रभाव के बारे में जानकारी प्रदान कर सकता है।

खुले प्रश्नन्लेषण


● व्यापारिक हवाएँ क्या हैं? वे कैसे घटित होती हैं, और उनका क्या महत्व है?

● वायुमंडलीय हवाएँ क्या हैं? वे कहाँ घटित होती हैं, उनका क्या महत्व है?

● पक्षी बिना ऊर्जा समाप्त हुए एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक बहुत लंबी दूरी तक कैसे उड़ते हैं?

● क्या किसी भी स्थान पर पवन चक्कियाँ स्थापित करना संभव है? हाँ या नहीं, स्पष्ट करें।

रोचक तथ्य


पवन आरेख: एक निश्चित अवधि में दर्ज की गई हवा की दिशा और गति को पवन आरेख के रूप में दर्शाया जा सकता है। पवन आरेख एक प्रकार का मौसम मानचित्र है जो विभिन्न दिशाओं में बहने वाली हवाओं की आवृत्ति और शक्ति को दर्शाता है। औद्योगिक पर्यावरण प्रबंधन, गैसीय और कणीय प्रदूषकों के आंकलन और प्रबंधन, चिमनी धूम्र की निगरानी और उत्सर्जन के फैलाव, समुद्री परिवहन, विमानन, पवन ऊर्जा प्रतिष्ठान, कृषि आदि में इसका अत्यधिक महत्व है।

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