हमारे बारे में

प्रकृति मीडिया शाला के बारे में –

गतिविधि आधारित अधिगम, या दूसरे शब्दों में कहें तो क्रियात्मक अनुसंधान, बच्चों और अन्य जिज्ञासु शिक्षार्थियों को अन्वेषणशील, पर्यवेक्षी और नवाचारी विचारक बनने में मददगार है। बच्चों के ज्ञान के विकास में रोचक तरीके से मदद करने के अलावा, गतिविधि आधारित अधिगम योजना बनाने, अभिकल्पित करने, आयोजन करने, समूह कार्य गतिविधियाँ करने, एवं चर्चा, संचार, तथ्यात्मक तर्क और पारस्परिक सहयोग की प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षार्थियों और अभ्यासकर्ताओं में सामाजिक कौशल विकसित करने में भी मदद करता है। यह पुस्तक में दी गई पाठ्य सामग्री को रटने के बजाय, वास्तविक अनुभव के माध्यम से शिक्षार्थियों में तथ्यों के बारे में ज्ञान का विकास करने में भी मदद करता है।

रुचि/ दिलचस्पी सक्रिय मस्तिष्क का विकास करती है और यह बच्चों को समय और गति के किसी भी तनाव से मुक्त रखते हुए तथ्यों को उनकी अपनी गति और समय के अनुसार सीखने में मदद करती है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा ब्यूरो, यूनेस्को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने पाठ्यक्रम और संबंधित मामलों में 'बाल केंद्रित दृष्टिकोण' पर भी जोर दिया है, अर्थात बच्चों को सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में रखना, जिसमें वे अपनी पसंद की गतिविधियों के आधार पर सक्रिय प्रतिभागी होते हैं।

साइंस सेंटर (ग्वालियर), मध्य प्रदेश के संस्थापकों का दृढ़ विश्वास था कि 'बाल केंद्रित दृष्टिकोण' को सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में रखना चाहिए, जिसमें बच्चे अपनी पसंद की गतिविधियों के आधार पर सक्रिय प्रतिभागी होते हैं। अतः उन्होंने गतिविधि आधारित वैज्ञानिक कार्यक्रमों की रचना और विकास करते हुए उनके माध्यम से विज्ञान लोकप्रियकरण का काम करना शुरू किया। 1988 में साइंस सेंटर ने अपने प्रमुख कार्यक्रम के रूप में ‘जन विज्ञान आंदोलन’ शुरू किया और मध्य प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में विज्ञान लोकप्रियकरण गतिविधियों का आयोजन किया ताकि माता-पिता और उनके माध्यम से बच्चों को रोजमर्रा के विज्ञान को रोचक तरीके से सीखने की दिशा में सार्थक मार्ग मिल सके। 'जन विज्ञान आंदोलन' के दौरान विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियाँ आम जनता, विद्यालय और महाविद्यालय समुदायों तक पहुँचने के लिए आयोजित की गईं, जिनमें पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम, प्रकृति शिविर, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति एवं स्वास्थ्य पर सर्वेक्षण, विज्ञान लोकप्रियकरण रैलियाँ और मार्च (विज्ञान यात्रा), विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान लेखन, प्रदर्शन और नाटक, कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण, संगोष्ठियाँ, चमत्कारों के वैज्ञानिक स्पष्टीकरण पर प्रदर्शन, जन माध्यमों का उपयोग, लोक कला, जन विज्ञान उत्सव, स्थानीय पर्यावरणीय मुद्दों पर अभियान, स्वास्थ्य केंद्रित गतिविधियाँ और स्कूलों में 'बच्चों की विज्ञान परिषद' (बाल विज्ञान परिषद) की स्थापना इत्यादि शामिल हैं।

साइंस सेंटर ने पाठ्यक्रम और सह-पाठ्यक्रम के सीखने के अवसरों में गुणात्मक दक्षता विकसित करने के उदेश्य से लैंगिक, आर्थिक वर्ग, सामाजिक पृष्ठभूमि और भौगोलिक पहुँच में समानता रखते हुए उपागम (मॉड्यूल) और गतिविधि साज-सामान विकसित (किट) एवं वितरित किये। अन्य संगठनों के साथ मिलकर देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिससे 'जन विज्ञान आंदोलन' का व्यापक प्रसार हुआ।

पिछले दो दशकों में, प्राकृतिक पर्यावरण का महत्व मुख्य रूप से विनाशकारी मानवजनित गतिविधियों के कारण हुए अपूरणीय परिवर्तनों के चलते अधिक जाना गया है। प्रकृति के पास अपने स्वास्थ्य और मानवजनित परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रियाओं को दर्शाने के लिए अपने तरीके हैं। पारिस्थितिकीय (प्राकृतिक) संकेतकों की जांच करके कोई भी प्रकृति के विभिन्न घटकों की स्थिति जान सकता है और यह निर्धारित कर सकता है कि घटक अच्छी स्थिति में है या बुरी स्थिति में। प्रकृति और उसके घटकों के अध्ययन में, उद्देश्य और आवश्यकता के अनुसार यह निर्धारित किया जा सकता है कि किन प्राकृतिक संकेतकों की जांच की जानी चाहिए। प्राकृतिक संकेतकों के कुछ व्यापक उदाहरण हैं: जल, वायु, मृदा और वातावरण की भौतिक-रासायनिक विशेषताएँ; जैवविविधता के संघटन और उसमें घटित होने वाले कार्य; जीवित जीवों की संरचनात्मक, आकारिकीय और शारीरिक विशेषताएँ; प्रकृति के जीवित और निर्जीव घटकों के बीच होने वाली अंतःक्रियाएँ; खगोलीय पिंडों की स्थिति का पृथ्वी पर जीवमंडल के कार्यों पर प्रभाव आदि। 

ईको यूरेका किट की उत्पत्ति –

यह समझते हुए कि अभी भी पर्यावरण के जीवित और निर्जीव घटकों, उनके भौतिक-रासायनिक और जैविक गुणों, कार्यों और परस्पर क्रियाओं का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक साधन साज-सामान की कमी है, साइंस सेंटर ने हाल ही में 'इको यूरेका किट' विकसित की है। यह एक ऐसा प्रयास है जिससे युवा पीढ़ी और रुचि रखने वाले लोग सरल उपकरणों और तकनीकों के साथ तनाव मुक्त वातावरण और खेल-खेल में प्रकृति और उसके जीवित एवं निर्जीव घटकों का अध्ययन और परीक्षण कर सकें। इस किट में 70 से अधिक उपकरणों/साधनों का संग्रह है जो आसानी से उपलब्ध हैं और स्थानीय सामग्री का उपयोग करके आसानी से एकत्रित किए/ बनाए  जा सकते हैं। यह किट पानी, मिट्टी, जैवविविधता, पृथ्वी और वायुमंडल तथा खगोल विज्ञान सहित प्रकृति और उसके घटकों का अध्ययन और जांच करने में उपयोगी है।

ईको यूरेका किट साइंस सेंटर के 'जन विज्ञान आंदोलन' और 'बाल केंद्रित दृष्टिकोण' में एक और उपलब्धि है और यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) की प्राप्ति में भारत के योगदान को बढ़ाएगी, जिसका उद्देश्य 'सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और जीवन भर सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना' है।

ईको यूरेका किट की गतिविधि पुस्तिका में पानी, मिट्टी, जैवविविधता, पृथ्वी और वायुमंडल तथा खगोल विज्ञान नामक 5 मुख्य विषयों के अंतर्गत 34 गतिविधियों के विवरण और गतिविधियों को करने के निर्देश हैं। दिए गए निर्देशों में गतिविधि की प्रक्रिया का क्रमिक तरीका शामिल है (अर्थात गतिविधि की अवधारणा, चित्र, किट सामग्री, विधि, आंकड़ों का संग्रहण और विश्लेषण, परिणाम, सीखे गए मुख्य बिंदु और खुले प्रश्न)।

पहले मुख्य विषय जल में 5 गतिविधियाँ, दूसरे मुख्य विषय मृदा में 7 गतिविधियाँ, तीसरे मुख्य विषय जैवविविधता में 14 गतिविधियाँ, चौथे मुख्य विषय पृथ्वी और वायुमंडल में 5 गतिविधियाँ और पाँचवे मुख्य विषय खगोल विज्ञान में 3 गतिविधियाँ शामिल हैं। सभी गतिविधियों को उनके भौतिक/रासायनिक/जैविक गुणों की जांच के तरीके के अनुसार वर्णित किया गया है। बच्चों को विषयगत गतिविधियों और उनके पीछे के विज्ञान के बारे में अधिक जानने और खोजने में मदद करने के लिए प्रत्येक गतिविधि के अंत में खुले प्रश्न दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य गतिविधियों की सूची भी दी गई है, जिन्हें किट सामग्री का उपयोग करके अध्ययन और प्रयोग किये जा सकते हैं। 

कक्षा में इसके उपयोग के अलावा यह किट बिना अधिक पर्यवेक्षण/देखरेख के कक्षा के बाहर भी प्रयोगात्मक और खोजपूर्ण गतिविधियों में बच्चों के लिए और भी अधिक सहायक है। वे इसे समय और स्थान की सुविधा के अनुसार उपयोग कर सकते हैं। यह किट विभिन्न आयु के बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और माता-पिता सहित बड़ों द्वारा भी उपयोग की जा सकती है। यह इच्छुक व्यक्तियों, विज्ञान क्लब, इको-क्लब, विज्ञान आधारित स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों के लिए भी रुचिकर होगी जो बाल केंद्रित प्रकृति अध्ययन गतिविधियों के बारे में सोचते हैं।

'शून्य अपशिष्ट' और 'अपशिष्ट के पुनर्चक्रण' के संदेश को फैलाने के लिए किट बॉक्स को पुर्ननर्वीनीकृत कागज और कपड़े की हस्तनिर्मित शीट से बनाया गया है। हस्तनिर्मित शीट का उत्पादन और किट बक्से की अभिकल्पना और निर्माण साइंस सेंटर की पुनर्नवीनीकृत कागज निर्माण इकाई ‘सदेव क्रीयेशन्स’ द्वारा किया गया है।

प्रकृति मीडिया शाला (आभासी मंच) -

ईको यूरेका किट का शिक्षार्थियों और अभ्यासकर्ताओं के बीच सफलतापूर्वक परिचय देने के बाद यह महसूस किया गया कि इसे भौतिक रूप के अलावा आभासी रूप में भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि यह अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और शिक्षार्थी र्और अभ्यासकर्ता इससे सीख सकें, और अपनी गतिविधियों को साझा करके योगदान प्रदान कर सकें। इसलिए साइंस सेंटर ने इस आभासी संस्करण को 'प्रकृति मीडिया शाला' के नाम से अभिकल्पित किया है ताकि पानी, मिट्टी, जैवविविधता, पृथ्वी और वायुमंडल तथा खगोल विज्ञान के पांच मूलभूत घटकों के बारे में जानने, जांचने और प्रयोग करने का अवसर मिल सके। यह ‘विज्ञान मीडिया’, ‘खेल में सीखना’ और 'स्वयं करो' विधियों पर आधारित है।

लक्षित समूह - प्रकृति मीडिया शाला के लक्षित समूह बच्चे/ विद्यार्थी, शिक्षक, युवा, आम जनता और वृहद रूप में पूरा समाज हैं।

 

प्रकृति मीडिया शाला के उद्देश्य -

• पर्यावरण की मूलभूत अवधारणाओं को समझना जो विभिन्न विषयों में भी शामिल होती हैं।

• पारिस्थितिकी, प्रकृति और इसके घटकों के बारे में जानना।

• इस तथ्य पर जोर देना कि प्रकृति और पर्यावरण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम क्रिया आधारित होने चाहिए।

• लक्षित समूहों के मध्य सम्प्रेषण और सहभागिता के लिए एक मंच प्रदान करना।

• पर्यावरणीय वैज्ञानिक अन्वेषण और पर्यावरण-सांस्कृतिक परंपराओं के लिए रचनात्मकता को बढ़ावा देना।

• विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं के प्रति जिज्ञासा विकसित करना और ‘स्वयं करके देखो’  गतिविधियों के माध्यम से इसे संतुष्ट करना।

• प्रकृति के प्रति सौंदर्यबोध और सम्मान का विकास करना।

• लोगों के प्रकृति के साथ संबंध को मजबूत करना।

• विभिन्न जीवित रूपों के प्रति जागरूकता, प्रेम और करुणा विकसित करना।

 

प्रकृति मीडिया शाला के प्रमुख बिन्दु  -

• ईको यूरेका किट में वर्णित प्रयोगात्मक गतिविधियों के वीडियो बनाने के लिए पटकथा की तैयारी।

• वीडियो का निर्माण।

• शिक्षकों और अन्य विज्ञान अभ्यासकर्ताओं के लिए देश में क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन, ताकि वे ईको यूरेका किट का उपयोग कुशलता से कर सकें और वे इसका उपयोग करने के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए प्रशिक्षक और शिक्षक के रूप में भी काम कर सकें।

• युवा शिक्षार्थियों को तनाव मुक्त वातावरण में इस किट का रोचक रूप से उपयोग करने के उदेश्य से खेल और अन्य रोचक गतिविधियों का विकास।

• अतिरिक्त संसाधनों जैसे द्वितीयक जानकारी, तथ्य, रिपोर्ट, प्रमुख वेबसाइटों के लिंक आदि प्रदान करना।

• 'प्रकृति मीडिया शाला' की वेबसाइट का निर्माण और विकास। वेबसाइट को छात्रों, शिक्षकों, विज्ञान अभ्यासकर्ताओं और संस्थागत साझेदारों सहित व्यक्तिगत साझेदारों के योगदान (वीडियो, छायाचित्र, रिपोर्ट, समाचार, श्रवण सामग्री आदि के रूप में) द्वारा और समृद्ध किया जाएगा।

 

प्रकृति मीडिया शाला आभासी मंच के लाभ -

यह विभिन्न जन समूहों के बीच प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिकीय प्रक्रियाओं के विभिन्न पहलुओं के बारे में बेहतर समझ और जागरूकता पैदा करने में मदद करेगा, जिसमें सीखने के लिए आभासी प्रयोग आधारित दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया जाएगा।

• ईको यूरेका किट का उपयोग करके और इस आभासी मंच पर प्रदर्शित विचारों की मदद से गतिविधियों को करके लोग पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे और उनमें होने वाले प्राकृतिक और मानवजनित परिवर्तनों की पहचान कर सकेंगे।

• यह 'करके सीखने' और 'सीखकर करने' के लिए एक सुलभ सुविधा के रूप में काम करेगा।

• यह आभासी मंच शिक्षार्थियों और अभ्यासकर्ताओं को अपने विचारों और नवाचारों को विकसित करने का अवसर भी प्रदान करेगा ताकि वे प्रकृति और इसके घटकों को खोज सकें और इस मंच पर अपने विचारों और अनुभवों को साझा कर सकें। 

• प्रकृति मीडिया शाला मंच समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को विज्ञान की विधि को समझने, गतिविधियाँ करने और अपनी गतिविधियों को वीडियो, छायाचित्र, समाचार, श्रवण सामग्री आदि के रूप में साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।

• यह मंच इस एहसास को भी बढ़ावा देगा कि हम सभी प्रकृति की समस्याओं के समाधान का हिस्सा हैं और व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से हम सभी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

प्रेरक समर्थन - प्रकृति मीडिया शाला के विकास को राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा समर्थन प्राप्त है।