जल निकाय में प्रकाश एक महत्वपूर्ण अजैविक कारक है जो जलीय पौधों में प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। यदि प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया किसी भी तरह से बाधित होती है तो प्राथमिक स्तर पर भोजन का उत्पादन और उसके बाद की खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। किसी जल निकाय में जलीय पौधे उस गहराई तक वितरित होते हैं, जहां तक सूर्य का प्रकाश पहुंचता है। इसी प्रकार किसी जल निकाय में दृश्यता या पारदर्शिता उस गहराई तक संभव है, जहां तक सूर्य का प्रकाश या अन्य स्त्रोत से प्रकाश पहुंचता है।
किसी भी जल निकाय में पारदर्शिता को 'सेची डिस्क' नामक एक साधारण उपकरण की सहायता से मापा जा सकता है। सेची डिस्क एक धातु की प्लेट है जिस पर एकान्तरित काले और सफेद वृत्तखंड चित्रित होते हैं। धातु सामग्री इसे भारी बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती है जिससे यदि इसे किसी जलाशय में डाला जाता है तो यह पानी में तैरती नहीं है।
सेची डिस्क का कार्य सिद्धांत यह है कि जब इसे पानी में उतारा जाता है तो यह उस गहराई तक दिखाई देती है जहां तक उस समय प्रकाश पहुंच रहा होता है, और अधिक गहराई में उतारने पर यह अदृश्य हो जाती है। जब इसे ऊपर खींचा जाता है तो यह फिर से दिखाई देने लगता है। जिस रस्सी से इसे बांधा जाता है, उसे मापकर गहराई मापी जाती है। लुप्त होने और पुनः प्रकट होने की गहराई का औसत उस समय प्रकाश के प्रवेश की गहराई या पानी की पारदर्शिता है।
● सेची डिस्क,
● रस्सी,
● मापने वाला फीता
मापी गई गहराई के अवलोकन को व्यवस्थित रूप से सारणीबद्ध किया जा सकता है तथा आगे की गणना की जा सकती है। आंकड़ों को रिकॉर्ड करने और गणना करने के लिए यहाँ एक नमूना तालिका और आँकड़े दिए गए है –

● प्रत्येक बिन्दु के लिए पारदर्शिता की गणना की जाती है।
● एक ही जल निकाय में विभिन्न स्थानों पर या विभिन्न जल निकायों में विभिन्न स्थानों पर दर्ज की गई पारदर्शिता को उस बिन्दु पर पारदर्शिता भी कहा जाता है।
● किसी जल निकाय की औसत पारदर्शिता उस जल निकाय के सभी बिंदुओं पर मापी गई पारदर्शिता के औसत की गणना करके निकाली जा सकती है।
● जल निकाय में पारदर्शिता की घटना पानी में प्रकाश के प्रवेश के अनुरूप होती है।
● पानी में पारदर्शिता एक महत्वपूर्ण कारक है, जो प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करता है और इसके परिणामस्वरूप खाद्य श्रंखला, खाद्य जाल, तथा जीवों का वितरण भी प्रभावित होता है।
● जल निकाय में गंदगी या घुले एवं निलंबित पदार्थों की मात्रा से पारदर्शिता प्रभावित होती है।
● वे कौन से कारक हैं जो पानी की पारदर्शिता को प्रभावित करते है? अपने इलाके के जल निकाय में उनका पता लगाएँ।
● एक जलाशय में विभिन्न स्थानों/क्षेत्रों में पानी की पारदर्शिता का पता लगाएँ और विभिन्न क्षेत्रों की पारदर्शिता में अंतर का पता लगाएँ अर्थात तट के पास विभिन्न स्थानों पर, तट से जलाशय में अलग-अलग दूरी पर, आप क्या पाते हैं? क्या आपने पता लगाया इसके पीछे क्या कारण हैं?
● यदि आप दिन के अलग-अलग समय और/या अलग-अलग मौसमों में,या अनियमित या एक निश्चित अंतराल पर एक ही स्थान पर एक ही जल निकाय में पारदर्शिता मापते हैं, तो क्या अवलोकन प्राप्त होंगे?
● यदि अलग-अलग दृष्टि वाले व्यक्ति एक ही बिन्दु पर पानी की पारदर्शिता मापेंगे तो क्या होगा?
भारत की सबसे पारदर्शी नदी उमंगोट नदी है जिसे डॉकी नदी भी कहा जाता है। इस नदी का तल पानी की सतह के बहुत ऊपर से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। हालाँकि पारदर्शिता हर समय समान नहीं रहती है और यह नदी दिसंबर से मार्च तक सबसे अधिक पारदर्शी होती है। उमंगोट नदी पूर्वी खासी पहाड़ियों से निकलती है और एक छोटे से कस्बे डॉकी और गांवों श्नोंगपडेंग और उमवाह नोंगबाह से होकर गुजरती हुई लगभग 96 किलोमीटर की यात्रा करते हुए और भारत और बांग्लादेश के बीच एक विभाजन रेखा बनाती हुई बाद में बांग्लादेश में कलादन नदी में मिल जाती है।