मछली का शल्क एक छोटी कठोर प्लेट होती है जो मछली की त्वचा से निकलती है। मछली शल्क की जड़ मध्यजनस्तर (मीसोडर्म) (अधिचर्म और अंतर्निहित ऊतकों के बीच की परत) में धँसी होती है तथा वह वहीं से विकसित होता है। ‘शल्क’ (अंग्रेजी में scale) शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द "एस्केल" (escale) से हुई है, जिसका अर्थ है शंख फली या छिलका। शल्क का प्राथमिक उद्देश्य मछली के लिए कवच/सुरक्षात्मक आवरण के रूप में कार्य करना है और इसके अलावा ये प्रकाश के परावर्तन द्वारा छलावरण उत्पन्न कर छुपने में, रंग बदलने में, तथा जल के सापेक्ष गतियाँ करने में मददगार होते हैं। मछलियों में शल्कों के विकास के लिए जिम्मेदार गुणसूत्र स्तनधारियों में बालों के विकास के लिए जिम्मेदार गुणसूत्र के समान ही होते हैं।
मछली में शल्क एक के ऊपर एक इस प्रकार बढ़ते हैं कि शल्क का मुक्त सिरा पूंछ की ओर इंगित करता है। यदि हम अपना हाथ मछली के शरीर पर सिर से पूंछ की ओर सरकाते हैं तो यह चिकनी त्वचा जैसा महसूस होगा लेकिन यदि हम पूंछ से सिर की ओर हाथ सरकाते हैं तो शल्क के मुक्त सिरे हमें खुरदुरी बनावट का एहसास देते हैं।
मछली के शल्कों को चार प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है - प्लेकॉइड, गैनॉइड, साइक्लोइड और टेनॉइड।
प्लेकॉइड शल्क:
प्लेकॉइड शल्क, शल्क का सबसे प्राचीन रूप हैं। जैसे-जैसे मछली का आकार बढ़ता है, वे आकार में नहीं बढ़ते हैं, बल्कि कुछ शल्क आपस में जुड़ जाते हैं। प्लेकॉइड शल्क की संरचना में 3 परतें होती हैं। सबसे भीतरी गूदेदार संवहनी ‘कोर’ है जिसके ऊपर मध्य परत चुनायुक्त ऊतक की होती है जिसे डेंटाइन कहा जाता है और सबसे बाहरी परत कठोर पारदर्शी, अपारदर्शी या आंशिक रूप से अपारदर्शी, इनेमल जैसे पदार्थ से बनी होती है, जिसे विट्रोडेंटाइन कहा जाता है। उपास्थिमय मछलियों जैसे शार्क, रे, कीमेरा आदि में प्लेकॉइड शल्क पाए जाते हैं।
गैनॉइड शल्क :
गैनॉइड शल्क प्लेकॉइड शल्क की तुलना में थोड़ा कम प्राचीन होते हैं। जैसे-जैसे मछली की उम्र बढ़ती है, ये शल्क आकार में बढ़ते जाते हैं। गैनॉइड शल्कों की संरचना हीरे के आकार की, कठोर और मोटी दिखाई देती है। गैनॉइड शल्क गैनोइन (चमकदार पदार्थ जो कोरियम नामक त्वचा की गहरी संवहनी आंतरिक परत से स्रावित होता है, और शल्क की बाहरी परत बनाता है) से बनता है। बिचिर, पैडल फिश, बोउफिन, गार, स्टर्जन आदि मछलियों में गैनॉइड शल्क होते हैं।
सायक्लॉइड शल्क :
सायक्लॉइड शल्क उन्नत शल्क प्रकारों में से कम उन्नत हैं। जैसे-जैसे मछली की उम्र बढ़ती है, ये शल्क आकार में बढ़ते जाते हैं और वृद्धि को शल्क में बने वलय या छल्लों के रूप में देखा जा सकता है। इन वलय का संबंध मछली की आयु से हो सकता है। सायक्लॉइड शल्क पतले, गोलाकार शल्क होते हैं जो अधिचर्म और श्लेष्म (म्यूकस) की एक पतली परत से ढके होते हैं। इस शल्क के कारण मछली पर लसलसापन महसूस होता है। निचले क्रम की अस्थिल मछलियाँ जैसे साल्मन, कार्प, मिनो आदि में सायक्लॉइड शल्क पाए जाते हैं।
टेनॉइड शल्क :
टेनॉइड शल्क सभी शल्क रूपों में सबसे उन्नत हैं। जैसे-जैसे मछली का आकार बढ़ता है, इन शल्कों का आकार भी बढ़ता जाता है और यह वृद्धि शल्क के वलय या छल्ले के रूप में दिखाई देती है। टेनॉइड शल्क की संरचना साइक्लॉयड शल्क के समान ही होती है, केवल अंतर के रूप में शल्क के पिछले सिरे (मुक्त सिरे) पर छोटे कंघी जैसे उभार होते हैं। शल्क में ये उभार मछली को तेजी से तैरने में मदद करते हैं। उच्च गण की अस्थिल मछलियों जैसे टूना, पर्च, ड्रम, सनफिश आदि में टेनॉइड शल्क होते हैं।
शल्क की संरचना मछली समूहों के व्यापक वर्गीकरण में उपयोगी है। इस प्रकार, मछलियों में , प्लेकॉइड शल्क कॉंन्ड्रिकथिस (उपास्थि युक्त कठोर लोचदार ऊतक वाली मछलियां) की विशेषता हैं, गैनॉइड शल्क आदिम बोनी मछलियों में पाए जाते हैं, जबकि साइक्लोइड और टेनॉइड शल्क उच्च टेलोस्ट्स (बोनी मछलियों) में पाए जाते हैं।
शल्कों की संरचना मछलियों के वृहद् वर्गीकरण में सहायक है। इस प्रकार से, प्लेकॉइड शल्क कोंड्रिकथीज (उपास्थि, मजबूत लचीले ऊतकों युक्त) वर्ग की मछलियों का गुणधर्म है। गैनॉइड शल्क प्राचीन अस्थि युक्त मछलियों में, जबकि सायक्लॉइड और टेनॉइड शल्क उच्च टीलिओस्ट (अस्थि युक्त) मछलियों में पाए जाते हैं।
पेड़ों में वार्षिक वृद्धि वलय की तरह, साइक्लोइड और टेनॉइड मछली शल्क में भी वार्षिक वृद्धि वलय होते हैं। शल्क के वलय के स्वरूप के अवलोकन से मछली की आयु और वृद्धि के साथ-साथ उनके आवास में विद्यमान पर्यावरणीय स्थितियों का भी अनुमान लगा सकते हैं।