बादल बनना एक महत्वपूर्ण घटना है जो न केवल पृथ्वी के जल चक्र का आंतरिक हिस्सा है बल्कि मौसम का भी एक महत्वपूर्ण गुणधर्म है। बादल वायुमंडल में उठने वाले जलवाष्प के संघनन से बनते हैं। हालाँकि जलवाष्प हर उस वस्तु से उत्पन्न होता है जो गीली या पानी से संतृप्त होती है, लेकिन विशाल महासागरों से उत्पन्न होने वाला जलवाष्प दुनिया के बादलों के बनने में प्रमुख योगदान देता है। बादल समय और स्थान के अनुसार अलग-अलग तरीके से वायुमंडल में घूमते हैं और वर्षण के अलग-अलग रूपों में वर्षा करते हैं। बादल का पानी वायुमंडल में मौजूद गैसों और ठोस कणों (एयरोसोल) के साथ संपर्क करता है और उसके परिणामस्वरूप बादल तदनुसार परिवर्तित रासायनिक प्रकृति प्राप्त कर लेते हैं। बादलों की परिवर्तित रासायनिक प्रकृति उस गैस/ठोस कण के प्रकार के अनुसार भिन्न भिन्न होती है जिसके साथ वे परस्पर क्रिया करते हैं।
बादलों को उनके संघटन और निर्माण के अनुसार स्ट्रेटस, क्यूमुलस, सिरस, अल्टो, निंबस आदि के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इन संरचनाओं को जमीन से वायुमंडल में उनके ऊर्ध्वाधर वितरण के अनुसार निम्न स्तर के बादल, मध्यम स्तर के बादल, उच्च स्तर के बादल और ऊर्ध्वाधर विकास वाले बादल के रूपों में वर्गीकृत किया जाता है।
बादलों के बारे में जानकारी, विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान वर्षा , तूफान, गरज आदि जैसी संभावित मौसम स्थितियों के बारे में किसानों और आम जनता को सूचना और चेतावनी प्रसारित करने में बहुत उपयोगी हो सकती है। अभ्यास करके हम बादलों की संरचना के अनुसार अलग-अलग समय/ऋतुओं के दौरान मौसम की स्थिति का अनुमान भी लगा सकते हैं।
इस गतिविधि में हम शिक्षार्थियों को विभिन्न प्रकार के बादलों के बारे में उनकी संरचनाओं और वायुमंडल में वितरण के आधार पर जानने में मदद कर रहे हैं।
विवरण के साथ क्लाउड कार्ड (बादल पत्रक)
दिन के अलग-अलग समय के साथ-साथ विभिन्न ऋतुओं के दौरान दिखने वाले विभिन्न प्रकार के बादलों की जानकारी दर्ज करें।
सहायता के लिए यहां एक नमूना आंकड़ा तालिका दी गई है, आप आवश्यकता के अनुसार अपनी आंकड़ा तालिका तैयार कर सकते हैं -
बादलों के बारे में अपने प्रेक्षणों को उनकी श्रेणियों, अवधि, ऊर्ध्वाधर वितरण और अन्य व्याख्याओं के रूप में मात्रात्मक और गुणात्मक विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत करें।
● बादलों की संरचनाएं अलग-अलग होती हैं और वे वजन और गुरुत्वाकर्षण के अनुसार वायुमंडल में विभिन्न ऊंचाइयों पर वितरित होते हैं।
● बादलों को ध्यान से देखकर और अभ्यास करके हम बादलों की संरचना के अनुसार अलग-अलग समय के दौरान मौसम की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं।
● बादलों के अवलोकन से मौसम की स्थिति की भविष्यवाणी करना और विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान किसानों और अन्य लोगों को वर्षा , आंधी, तूफान आदि के बारे में चेतावनी जरी करना संभव है।
● क्या आप अपने ऊपर आकाश में बादलों के आवरण के बारे में जान सकते हैं? अन्वेषण करें।
● दिन और रात के समय हम भूदृश्य पर चांदनी और सूर्य के प्रकाश की रोशनी और छाया का निर्माण देखते हैं, यह कैसे होता है? क्या छाया घनत्व में भी भिन्न होती हैं?
● मानसून के समय जब बादल पहाड़ियों और ऊंची इमारतों को ढकते हुए दिखाई देते हैं, तो पहाड़ियों/इमारतों के बादल से ढंके वाले हिस्सों पर जाने का प्रयास करें और जांचें कि क्या आप बादलों को देख या महसूस कर सकते हैं?
● आकाश में बिजली चमकने का क्या कारण है और वह अंततः कहाँ जाती है?
अम्लीय वर्षा: वायुमंडल में उठने वाला जलवाष्प शुद्ध जल रूप होता है, लेकिन जब यह वायुमंडल के गैसीय माध्यम में से होकर चलता है और हवा में निलंबित ठोस कणों एवं अन्य कणीय पदार्थों (निलंबित कणीय पदार्थ और जहरीली गैसों सहित) के साथ संपर्क करता है तो पानी का शुद्ध रूप, प्रदूषक/हानिकारक पदार्थों के मिश्रण में परिवर्तित हो जाता है। अम्लीय वर्षा एक ऐसी घटना है जिसमें नाइट्रोजन और सल्फर के गैसीय यौगिक जलवाष्प के साथ क्रिया करते हैं और उसे अम्लीय बना देते हैं। जब ऐसी अम्लीय जलवाष्प बादलों के रूप में संघनित होकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरती है तो इसे अम्लीय वर्षा कहते हैं, जो पृथ्वी पर विभिन्न जीवन रूपों तथा अन्य पदार्थों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
बादल पृथ्वी के हरित गृह में योगदान करते हैं! : वायुमंडल में जलवाष्प उन कारकों में से एक है जो पृथ्वी पर प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव का कारण बनती हैं। अन्य गैसों की तरह, जल वाष्प भी पृथ्वी के निचले वायुमंडल में ऊष्मा विकिरणों को रोक लेती है और पृथ्वी के वायुमंडलीय तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन आजकल मानवजनित गतिविधियों के कारण वातावरण में हानिकारक गैसों और कणों के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण निचले वायुमंडल में अत्यधिक गर्मी जमा हो रही है और इसके परिणामस्वरूप मानव-जनित हरित गृह प्रभाव हो रहा है जो भूमंडलीय तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है।