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प्रकृति मीडिया शाला

प्रकृति मीडिया शाला बच्चों, शिक्षकों, युवाओं और आम जनता के लिए प्रकृति को समझने का एक आभासी अन्वेषण मंच है। यह विज्ञान संचार माध्यमों, खेल के रूप में, और 'स्वयं करो' तरीकों के अनुप्रयोग पर आधारित है। प्रकृति मीडिया शाला का विकास हाल ही में विज्ञान केंद्र द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के समर्थन से विकसित 'ईको  यूरेका किट' से प्रेरित है। ईको यूरेका किट में आसान उपकरणों का एक संग्रह और गतिविधि मार्गदर्शिका शामिल हैं, जो पानी, मिट्टी, जैवविविधता, पृथ्वी और वायुमंडल तथा खगोल विज्ञान के घटकों का अध्ययन और परीक्षण करने के लिए उपयोगी हैं।

प्रकृति मीडिया शाला, 'ईको यूरेका किट' का आभासी संस्करण है और यह विभिन्न लक्षित समूहों में प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं के विभिन्न पहलुओं के बारे में बेहतर समझ और जागरूकता पैदा करने में मदद करेगा, जिसमें सीखने के लिए प्रयोग आधारित दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया जाएगा। 'ईको  यूरेका किट' का उपयोग करके गतिविधियों को करने और आभासी मंच पर प्रदर्शित विचारों की मदद से, लोग पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे और उनमें होने वाले प्राकृतिक और मानव जनित परिवर्तनों की पहचान कर सकेंगे। एक तरह से यह 'करके सीखें' और 'सीखकर करें' की सुलभ सुविधा के रूप में कार्य करेगा। यह आभासी मंच शिक्षार्थियों और शिक्षाविदों को अपने विचारों को विकसित करने और प्रकृति तथा इसके घटकों का अन्वेषण करने के लिए नवाचारी तरीकों का निर्माण करने और, इस मंच पर अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने का अवसर भी प्रदान करेगा।

प्रकृति मीडिया शाला एक परस्पर संवादात्मक मंच है जहाँ समाज के विभिन्न वर्गों के लोग इस मंच पर सहभागी के रूप में पंजीकृत होकर विज्ञान की विधियों को समझ सकेंगे, गतिविधियाँ कर सकेंगे और अपने कार्यों को लेख, वीडियो, फोटो, वीडियो लिंक, समाचार कतरनें, श्रवण सामग्री आदि के रूप में साझा कर सकेंगे। यह मंच हमें यह अहसास कराने में मदद करेगा कि हम सभी प्रकृति की समस्याओं के समाधान का हिस्सा हैं और हम सभी इसमें अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (NCSTC) भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक शीर्ष संस्था है, जिसका उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जनसाधारण तक पहुंचाना, युवाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना और देश भर में ऐसे प्रयासों का समन्वयन और आयोजन करना है। यह समाज के उत्थान के लिए वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार एक सूचनाबद्ध तरीके से करती है और विभिन्न माध्यमों की सहायता से कार्यक्रम तैयार करती है, जो समाज के हर हिस्से और कोने तक पहुँचते हैं। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की मुख्य गतिविधियां विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार में प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी का विकास, उत्पादन और प्रसार, प्रोत्साहन कार्यक्रमों, और क्षेत्रीय गतिविधि आधारित विज्ञान-संचार परियोजनाओं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार में अनुसंधान, छात्रों और शिक्षकों को प्रेरित करना, पर्यावरण जागरूकता और महिलाओं के लिए विशेष घटक वाले कार्यक्रमों पर केंद्रित होती हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद ने विभिन्न कार्यक्रम विकसित किए हैं जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना और समुदाय में सूचनाबद्ध निर्णय लेने की क्षमता का निर्माण करना है। इन कार्यक्रमों में विभिन्न आयोजन, प्रसार गतिविधियाँ, प्रशिक्षण और उन्मुखीकरण, गतिविधि साज-सामान का विकास, उत्पादन और प्रसार आदि शामिल हैं। यह बच्चों को 'करके सीखें' के लिए प्रोत्साहित करने की भी आकांक्षा रखती है ताकि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें और बाद में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

अपने कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद  ने एक बहुआयामी प्रयास विकसित किया है जिसमें विज्ञान संचार और लोकप्रियकरण के लिए जन और डिजिटल संचार माध्यमों का उपयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लोकप्रियकरण के लिए सोशल मीडिया का उपयोग, वैज्ञानिक विषयों पर वर्ष भर में विभिन्न अभियान, इत्यादि शामिल हैं। इसके अधिकांश कार्यक्रम सरकारी और गैर-सरकारी भागीदारों की सहायता से लागू किए जाते हैं।

प्रकृति मीडिया शाला, 'ईको  यूरेका किट' का आभासी संस्करण है और साइंस सेंटर के इन दोनों कार्यक्रमों को राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा सहयोग दिया गया है। 

साइंस सेंटर (ग्वालियर), मध्य प्रदेश

  • साइंस सेंटर (ग्वालियर), मध्य प्रदेश की स्थापना वर्ष 1987 में बाल-केंद्रित दृष्टिकोण पर दृढ़ विश्वास के साथ की गई थी और इसने गतिविधि आधारित वैज्ञानिक कार्यक्रमों की योजना  और विकास के माध्यम से विज्ञान के प्रचार में काम करना शुरू किया। वर्ष 1988 में साइंस सेंटर ने 'जन विज्ञान आंदोलन' को अपने प्रमुख कार्यक्रम के रूप में शुरू किया और मध्य प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में विज्ञान लोकप्रियकरण गतिविधियाँ आयोजित कीं ताकि माता-पिता और उनके माध्यम से उनके बच्चे, दिन-प्रतिदिन के विज्ञान को दिलचस्प तरीके से सीख सकें। 'जन विज्ञान आंदोलन' के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन आम जनता, विद्यालय और महाविद्यालय समुदायों के लिए किया गया जिसमें पर्यावरण शिक्षा, प्रकृति शिविर, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति और स्वास्थ्य पर सर्वेक्षण, विज्ञान लोकप्रियकरण रैलियां और पदयात्राएँ, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, लेखन, प्रदर्शन और नाटक, कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण, गोष्ठियाँ, चमत्कारों की वैज्ञानिक व्याख्याओं के प्रदर्शन, जनसम्पर्क माध्यमों का उपयोग, लोक कलाएँ, जन विज्ञान महोत्सव, स्थानीय पर्यावरण मुद्दों पर अभियान, स्वास्थ्य केंद्रित गतिविधियाँ और स्कूलों में 'बाल विज्ञान परिषदों' का गठन शामिल हैं।


    विज्ञान केंद्र ने ऐसे संदर्शिकाएं और गतिविधि साज-सामान अभिकल्पित, विकसित और वितरित किए जो पाठ्यक्रम और सह-पाठ्यक्रम सीखने के अवसरों में गुणात्मक दक्षता को विकसित करने में मददगार हों और लिंग, आर्थिक वर्ग, सामाजिक पृष्ठभूमि और भौगोलिक पहुँच में समानता सुनिश्चित करें। देश के विभिन्न हिस्सों में अन्य संगठनों के साथ सहयोग से कई प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जो 'जन विज्ञान आंदोलन' के व्यापक प्रसार में सहायक रहे।

  • विज्ञान लोकप्रियकरण के क्षेत्र में 'बाल विज्ञान कांग्रेस' (Children Science Congress)  साइंस सेंटर का एक प्रमुख योगदान है जो 1987 में क्षेत्रीय स्तर पर शुरू की गई और इसके बाद वर्ष 2000 में 'शिक्षक विज्ञान सम्मेलन' शुरू किया गया। बाल विज्ञान काँग्रेस  और शिक्षक विज्ञान सम्मेलन का मूल विचार यह था कि विज्ञान की पढ़ाई को एक आनंददायक और रचनात्मक प्रयास में बदलना संभव है, और मौजूदा औपचारिक शिक्षा प्रणाली की सीमाओं के भीतर भी बच्चों को स्थानीय मुद्दों पर अध्ययन की योजना बनाने, प्रयोग की रूपरेखा बनाने और संचालन करने, आंकड़े और जानकारी एकत्र करने, और आसपास के पर्यावरण में समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। जब बाल विज्ञान काँग्रेस को साइंस सेंटर ने 1993 तक सफलतापूर्वक आयोजित किया, तब राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद  (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ) नई दिल्ली ने साइंस सेंटर को 1987-1991 की अवधि के लिए विज्ञान लोकप्रियकरण के शीर्ष पुरस्कार से सम्मानित किया और बाल विज्ञान काँग्रेस  को 'राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस' (National Children Science Congress) के रूप में अपने प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल किया। शिक्षक विज्ञान सम्मेलन को भी 2004 में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा 'राष्ट्रीय शिक्षक विज्ञान सम्मेलन' (National Teachers Science Congress) के रूप में उनके प्रमुख कार्यक्रम के रूप में अपनाया गया। साइंस सेंटर की मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (NCSC) और राष्ट्रीय शिक्षक विज्ञान सम्मेलन (NTSC) के राज्य समन्वयक के रूप में सेवाएँ जारी हैं।

    पर्यावरण के जीवित और निर्जीव घटकों, उनके भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों, कार्यों और परस्पर क्रियाओं का अध्ययन करने के लिए 'आसानी से इकट्ठा होने लायक, सुविधाजनक और बहुउद्देशीय' साज-सामान संग्रह की आवश्यकता को महसूस करते हुए साइंस सेंटर ने 'ईको  यूरेका किट' विकसित की है, जो पानी, मिट्टी, जैवविविधता, पृथ्वी और वायुमंडल तथा खगोल विज्ञान जैसे घटकों का अध्ययन और परीक्षण करने के लिए उपयोगी है। ईको यूरेका किट और इसका आभासी संस्करण, ‘प्रकृति मीडिया शाला’ दोनों साइंस सेंटर के 'जन-केंद्रित दृष्टिकोण युक्त जन विज्ञान आंदोलन’ का हिस्सा हैं। ये दोनों भौतिक और आभासी संस्करण भारत के 'संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4)' को प्राप्त करने में भी योगदान करेंगे, जिसका उद्देश्य 'समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और सभी के लिए जीवन भर सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना' है।

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