मिट्टी की बनावट से तात्पर्य विभिन्न अनुपातों में रेत (बालू), सिल्ट (गाद / तलछट) और क्ले (चिकनी मिट्टी) के आकार के कणों के संगठन से है जो मिट्टी के खनिज अंश को बनाते हैं। मिट्टी की बनावट मिट्टी के उपयोग के लगभग हर पहलू के साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को भी प्रभावित करती है, जिसमें जैव-भू-रासायनिक चक्र और मिट्टी निर्माण आदि जैसी महत्वपूर्ण आलम्बन सेवाएं भी शामिल हैं। मिट्टी की बनावट मिट्टी-पानी के संबंधों, गैसीय विनिमय, मिट्टी के पोषक तत्वों का धारण, खनिज और कार्बनिक यौगिकों को बहुत प्रभावित करती है।
विभिन्न आकार के कणों की संरचना के अनुसार मिट्टी की बनावट को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। प्रमुख वर्ग हैं रेतीली (बलुई), दोमट, चिकनी (क्ले), दोमट रेत (सिल्ट), रेतीली दोमट, सिल्ट दोमट, बलुई चिकनी दोमट, सिल्ट चिकनी दोमट, चिकनी दोमट, बलुई चिकनी तथा सिल्ट चिकनी हैं।
क्षेत्र में मिट्टी की बनावट जानने के लिए कई सरल विधियाँ हैं। उदाहरण के लिए, मिट्टी को हाथ में लेकर उसे दबाकर गेंद बनाना, गेंद को किसी कठोर सतह पर फेंकना, गेंद को कुचलना आदि; अंगूठे और तर्जनी के बीच मिट्टी को धकेल कर फीते के रूप में निकलना, मिट्टी को रगड़ कर, मिट्टी को पानी में मिलाकर और पानी को हिलाकर अलग-अलग आकार और वजन वाले मिट्टी के कणों को पानी में अलग-अलग परतों में बैठने देना। मिट्टी की बनावट निर्धारित करने के लिए अन्य प्रयोगशाला परीक्षण भी हैं, सबसे आम है मिट्टी को छानना और विभिन्न आकार के कणों के अनुपात से बनावट वर्ग निर्धारित करना।
मिट्टी के नमूने एकत्र करके और उनकी बनावट की जांच करके किसी क्षेत्र के लिए मिट्टी बनावट का नक्शा तैयार किया जा सकता है। किसी क्षेत्र में मिट्टी की बनावट के प्रकार को समझकर पादप विविधता का वितरण, फसल प्रारूप और पोषक तत्वों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।