प्रयोग विवरण

चींटियों के रहने और उनके अवलोकन के लिए एक फॉर्मिकेरियम (चींटी घर) बनाना


इस गतिविधि के बारे में


 

चींटियाँ स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग हैं। चींटी घर चींटियों के लिए बनाई गई एक कृत्रिम आवासीय संरचना है जिसमें हम उन्हें उनकी सामाजिक संरचना, गतिविधियों, व्यवहार आदि को देखने और समझने के लिए रख सकते हैं। चींटी घर प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाया जाता है। इसकी आंतरिक संरचना चींटियों द्वारा प्राकृतिक रूप से बनाए गए प्रारूप के अनुसार बनाई जाती है और यह जमीन में चींटियों के घर के ऊर्ध्वाधर काट की तरह दिखती है। चींटी घर का दरवाजा चींटियों के लिए प्रवेश द्वार होता है। इस छोटे से घर के अंदर छोटी-छोटी गुहिकाएँ बनी हुई होती हैं जो चींटियों के अंदर जाने और कुछ समय तक गुहिकाओं में रहने के लिए मुख्य प्रवेश मार्ग से जुड़ी हुई होती हैं। चींटियों के घर का दृश्य भाग एक पारदर्शी सामग्री से  ढँका हुआ होता है जिसके द्वारा कोई भी देख सकता है कि अंदर क्या हो रहा है। 

आवश्यक सामग्री


  • एक चींटी घर

      चींटी घर कैसे बनाएं:

  1. एक आयताकार कार्डबोर्ड या प्लास्टिक का बॉक्स लें जिसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई/गहराई कम से कम 6 x 3 x 2 इंच हो। वैकल्पिक तौर पर आप मिठाई का खाली डिब्बा या चॉकलेट का डिब्बा भी ले सकते हैं। 
  2. थोड़ा सा गेहूं का आटा लें और उसको थोड़ा सख्त गूंथ लें और फिर उसे लंबे डंठल का आकार दें, जिसमें उसकी लंबाई में छोटे-छोटे डंठलों पर छोटे छोटे गोले बना लें। आटे के इस आकार की मोटाई/ऊंचाई लिए गए बॉक्स की गहराई से कम होनी चाहिए तथा यह आकार बॉक्स की 3/4 से अधिक लंबाई से ज्यादा में फैलना नहीं चाहिए। 

 

  1. आटे से बनी आकृति को डिब्बे में उसकी लंबाई के हिसाब से इस प्रकार रखें कि उसका मुख्य डंठल (लंबा तना) लंबाई में डिब्बे के एक सिरे के मध्य को छू रहा हो।
  2. अब प्लास्टर ऑफ पेरिस का गाढ़ा घोल बनाएं और इसे डिब्बे में इस तरह भरें कि आटे से बनी संरचना पूरी तरह ढँक जाए।
  3. इसे 5-6 घंटे के लिए जमने के लिए रख दें और इसके बाद आटे को प्लास्टर ऑफ पेरिस की जमी हुई संरचना से निकाल लें।
  4. प्लास्टर ऑफ पेरिस से बना हुआ आपका फॉर्मिकेरियम (चींटी घर) तैयार है (ऊपर चित्र देखें)।

 

नोट- आप चींटियों के घर को और भी बड़ा बना सकते हैं, जिसमें अधिक शाखाएँ, उप-शाखाएँ और गुहाएँ हों, बशर्ते आपके पास इसे सुरक्षित स्थान पर रखने की सुविधा होनी चाहिए।

 

                                                            

तरीका


● चींटी घर बना लेने के बाद चींटियों के लिए कुछ भोजन, जैसे गुड़ या मीठा या अनाज, चींटी घर की गुहाओं के अंदर रखें।

● चींटियों के घर को एक कोने में छायादार स्थान पर रखें। 

● धीरे-धीरे आसपास की चींटियां चींटीघर तक पहुंचने लगेंगी। प्रारंभ में चींटियाँ आएंगी, खाएँगी और बाहर चली जाएँगी। हर बार आपको खाद्य सामग्री फिर से भरनी होगी ताकि चींटियाँ सुरक्षित महसूस करें और समय के साथ गुहाओं में बसना पसंद करें।

● एक बार जब चींटियाँ इसमें अनुकूलित हो जाएँ, तो उनका अवलोकन शुरू करें।

● अलग-अलग समय अंतराल पर चींटियों की सामाजिक संरचना, व्यवहार, भोजन की आदत आदि का निरीक्षण करें और दर्ज करें। सामग्री ले जाने के लिए वे एक-दूसरे के साथ कैसे सहयोग करती हैं, कैसे वे सहयोगात्मक तरीके से विभिन्न गतिविधियों का प्रबंधन करती हैं, कैसे प्रत्येक चींटी की एक अनूठी भूमिका होती है, चींटियाँ किस प्रकार की खाद्य सामग्री पसंद करती हैं आदि।

● आप विभिन्न मौसमों के दौरान चींटियों का अध्ययन करने के लिए भी चींटी घर का उपयोग कर सकते हैं।

 

डेटा संग्रह और विश्लेषण


अपने अवलोकनों को डेटा प्रारूप में व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड करें। आंकड़ा तालिका का एक उदाहरण यहां दिया गया है; आप आवश्यकता के अनुसार अपनी स्वयं की आंकड़ा तालिका तैयार कर सकते हैं।

परिणाम


आप अपने आंकड़ों का मात्रात्मक और गुणात्मक रूप से विश्लेषण कर सकते हैं और उसके अनुसार व्याख्या कर सकते हैं।

सीखे गए मुख्य बिंदु


● चींटी घर चींटियों की सामाजिक संरचना और व्यवहार को देखने और जानने का एक आसान साधन है।

● चींटियाँ हर कैसा भोजन नहीं खातीं और उनकी भी भोजन प्राथमिकताऐं होती हैं।

● हम ऐसे चींटी घर बनाकर अपने क्षेत्र में चींटी विविधता की रक्षा कर सकते हैं।

खुले प्रश्नन्लेषण


● चींटियाँ अपने घर के अंदर तापमान और वायु संचार कैसे बनाए रखती हैं?

● क्या चींटियाँ सोती भी हैं? अथवा, क्या वे हर समय जागती रहती हैं? वे रात के दौरान क्या करती हैं?

● क्या चींटियों की गतिविधियों का दिन-रात चक्र होता है?

● कभी-कभी आप चींटियों को किसी निश्चित पथ पर चलते हुए देखते हैं और वो इस पथ से विचलित नहीं होती हैं, वे इसे कैसे प्रबंधित करती हैं?

● क्या चींटियाँ सूंघती हैं? कसकर भरे थैलों में भी वे खाद्य सामग्री कैसे ढूंढ लेती है?

● क्या चींटियाँ जैव संकेतक के रूप में कार्य करती हैं? एक उदाहरण दीजिए जिससे पता चले कि वे क्या संकेत कर रही हैं।

 

रोचक तथ्य


पृथ्वी पर चींटियों की 15700 से अधिक प्रजातियाँ और उप-प्रजातियाँ हैं। चींटियाँ पृथ्वी पर सभी कीटों के जैवभार का 2/3 हिस्सा बनाती हैं।

अधिक जानकारी के लिए आप निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं - https://www.pnas.org/doi/full/10.1073/pnas.2201550119

भारत में चींटियों की विविधता और स्थानिकता:

भारत में चींटियों के 100 वंशों के अंतर्गत 828 ज्ञात प्रजातियाँ हैं। 256 (31%) प्रजातियाँ भारत के लिए स्थानिक हैं (अर्थात वे केवल भारत के कुछ हिस्सों में पाई जाती हैं और दुनिया में कहीं नहीं)। जबकि, 24 प्रजातियाँ गैर-देशी हैं (अर्थात वे भारत के अलावा अन्य विश्व के क्षेत्रों से हैं)। भारत में चींटी प्रजातियों की स्थानिकता (31%) अन्य स्थानिक जंतु प्रजातियों स्तनधारी (11%), मछलियां (8%), पक्षी (4.3%) और पुष्पीय पादप (10%) की तुलना में बहुत अधिक है। इसका मतलब है कि भारत में पाई जाने वाली प्रत्येक तीन चींटी प्रजातियों में से एक स्थानिक है।

भारत में चींटी विविधता के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं - https://zookeys.pensoft.net/article/6767/

 

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