पृथ्वी पर स्थलीय क्षेत्रों के साथ-साथ पृथ्वी के चारों ओर गैसीय आवरण (वायुमंडल) दोनों में वायु एक महत्वपूर्ण घटना हैं। हवाओं का प्रवाह और उनके विभिन्न स्वरूप पृथ्वी के स्वयं के घूमने और सूर्य द्वारा पृथ्वी के असमान तापन के द्वारा कारित होते हैं। वायुमंडल में दबाव और तापमान का अंतर हवाओं के उत्पन्न होने की प्राथमिक स्थितियाँ हैं। मानवजनित गतिविधियाँ भी पृथ्वी के तथा निचले वायुमंडल के असमान तापन का कारण बनती हैं और प्राकृतिक हवा के स्वरूप को प्रभावित करने में अप्राकृतिक कारक के रूप में योगदान करती हैं। वायु के प्रकारों को उनकी भौगोलिक स्थिति, दिशा, समय अवधि, मौसमी और क्षेत्रीय स्थितियों के आधार पर कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। उदाहरण के लिए, ग्रहीय या प्राथमिक हवाएँ, मानसूनी हवाएँ, पछुआ हवाएँ, व्यापारिक हवाएँ, स्थानीय हवाएँ, पहाड़ी हवा, घाटी की हवा, थलिय हवा, समुद्री हवा आदि। चरम मौसम की घटनाएँ जैसे आंधी, तूफान और चक्रवात आदि भी हवाओं से जुड़े होते हैं।
हवाओं में परिमाण, बल और दिशा होती है और इसलिए ये महत्वपूर्ण कारक हैं जो जीवित और निर्जीव घटकों को सीधे प्रभावित करने के अलावा अन्य पर्यावरणीय विशेषताओं और स्वरूप को भी प्रभावित करते हैं। हवाएँ नमी, गर्मी, कणों, गैसों आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती हैं। यहां तक कि अनेकों प्रदूषकों का उनके स्रोत से दूसरे क्षेत्रों में फैलाव भी हवाओं के कारण होता है। विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों में प्रतिदिन हवा की दिशाओं और गतियों में परिवर्तन होता है। हम तटीय क्षेत्रों, घाटी क्षेत्रों, रेगिस्तानी क्षेत्रों, उच्च पर्वतीय क्षेत्रों आदि में हवा के स्वरूप में दैनिक परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
वायु दिग्दर्शक हवा की दिशा अभिलेखित करने के लिए एक उपयोगी उपकरण है। इसमें एक तीर के आकार की संरचना होती है जिसे 'फलक' कहा जाता है, जो एक धुरी पर लगी होती है। फलक के दो सिरे होते हैं, जिनमें से एक तीर के आकार का होता है और हवा की दिशा में इंगित करता है जबकि दूसरा सिरा जो चौड़ा होता है, हवा को पकड़ता है। वायु दिग्दर्शक का उपयोग करके प्रत्येक दिन हवा के प्रवाह की दिशा का लेखा जोखा बनाए रखा जा सकता है।
हवा के वेग को मापने के लिए प्याला वायुवेगमापी सबसे सरल उपकरण है जिसमें ऊर्ध्वाधर शाफ़्ट पर क्षैतिज भुजाओं पर अर्धगोलाकार प्याले लगे होते हैं। किसी भी क्षैतिज दिशा में हवा का प्रवाह प्यालों को और उनसे लगे शाफ़्ट को घुमा देता है। शाफ़्ट के घूर्णन को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों की अनुपस्थिति में वायुवेगमापी की घूर्णन गति हवा की गति के समानुपाती होती है। एक समयावधि में घूर्णन की गणना करके प्रति घंटे की दूरी (उदाहरण के लिए किलोमीटर प्रति घंटा) इकाई में हवा की गति की गणना कर सकते है।
किसी समयावधि में दर्ज की गई हवा की दिशा और गति को ‘पवन आरेख’ नामक रेखाचित्र के रूप में दर्शाया जा सकता है। किसी क्षेत्र की हवा की दिशा और हवा की गति के अध्ययन से वैज्ञानिक अनुसंधान, निगरानी, भविष्यवाणी और नियोजन, शहरी क्षेत्रों और उद्योगों के विकास, कृषि और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन आदि में मदद मिलती है।