उप-विषयों

    हरित गृह


  • हरित गृह एक कृत्रिम कक्ष के अंदर के वातावरण के तापमान और आर्द्रता को बनाए रखने की एक तकनीक है जो विनियमित परिस्थितियों में सब्जियां, फूल और अन्य प्रकार के पौधों को उगाने के लिए उपयोगी है। हरित गृह की दीवारें और छत कांच या पारदर्शी चादरों से बनी होती हैं जिससे यह सूरज की रोशनी को प्रवेश करने की अनुमति तो देता है, लेकिन उन्हें वापस परावर्तित होकर बाहर जाने देने में बाधक होता है, साथ ही यह पृथ्वी से निकलने वाली भू-तापीय विकिरणों को अपने अंदर रोक लेता है, और इसलिए जब बाहरी वातावरण में परिस्थितियाँ स्थिर न हों तो यह अंदर अनुकूल तापमान और आर्द्रता को बनाए रखने में मदद करता है। हरित गृह बीजों के अंकुरण और उनके पौधों के स्वस्थ विकास के लिए एक पौधशाला की तरह भी उपयोगी है। यह छोटे पौधों को आवश्यक प्रकाश, हवा, गर्मी और नमी प्रदान करता है। हरित गृह के अंदर आर्द्रता आसपास के वातावरण की तुलना में कहीं अधिक रहती है जो बढ़ते पौधों के लिए बहुत अनुकूल रहती है। साथ ही यह छोटे पौधों को आराम से और लगातार बढ़ने के लिए लगातार स्वास्थ्यप्रद वातावरण प्रदान करता है।

    हरित गृह का सिद्धांत काफी रोचक है। हरित गृह की पारदर्शी दीवारें और छत सूरज की रोशनी को अंदर प्रवेश करने देती हैं। प्रवेश करने वाले सौर विकिरण उच्च ऊर्जा वाले होते हैं (अर्थात उच्च आवृत्ति और कम तरंग दैर्ध्य वाले लघु-तरंग विकिरण) जबकि आंतरिक सतहों से टकराने के बाद वे ऊर्जा का कुछ हिस्सा खो देते हैं और इसलिए परावर्तित विकिरणों में कम ऊर्जा होती है (अर्थात कम आवृत्ति और लंबी तरंग दैर्ध्य वाले दीर्घ-तरंग विकिरण)। परावर्तित विकिरण पारदर्शी दीवारों को पार करके बाहर निकलने में असमर्थ होते हैं और वापस कक्ष में परावर्तित हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप हरित गृह के अंदर की मिट्टी और हवा गर्म हो जाती है। इसके साथ ही भू-तापीय ऊर्जा (अर्थात पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी) भी हरित गृह  में रह जाती है, और परिणामस्वरूप तापीय ऊर्जा के कारण अंदर गर्मी बढ़ जाती है। गर्मी बढ़ने से मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण होता है और घर के अंदर नमी बढ़ती है जिससे बीजों को अंकुरित होने और अंकुरों को अच्छी तरह बढ़ने में मदद मिलती है।

    पृथ्वी के वायुमंडल में जल वाष्प, कार्बन-डाई-ऑक्साइड, मीथेन और अन्य गैसें सूर्य के आने वाले विकिरणों (जो उच्च ऊर्जा / लघु-तरंग विकिरण हैं) द्वारा आसानी से पार हो जाती हैं, जबकि पृथ्वी से वापस परावर्तित होने वाले विकिरण कमजोर हो जाते हैं (कम ऊर्जा / दीर्घ-तरंग विकिरण) और जलवाष्प एवं गैसीय आवरण से बाहर नहीं निकल पाते हैं। परिणामस्वरूप, ऊष्मा ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडलीय आवरण में फंस जाती है। यह ऊष्मा ऊर्जा हवा के गर्म होने और दुनिया भर में विभिन्न माध्यमों में तापमान के वितरण का कारण बनती है। इस तरह पृथ्वी का प्राकृतिक हरित गृह बना रहता है जो पृथ्वी पर वर्तमान जीवन रूपों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। हालाँकि मानवजनित गतिविधियों के कारण अधिक कार्बन-डाइ-ऑक्साइड, मीथेन और अन्य ऐसी गैसें उत्पन्न होती हैं जो भारी होती हैं और निचले वायुमंडल में रहती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह पर गर्मी का जमाव बढ़ जाता है और परिणामस्वरूप पृथ्वी पर अधिक गर्मी के हानिकारक परिणाम परिणाम दिखाई देते हैं। इस घटना को 'हरित गृह प्रभाव' कहा जाता है जो भूमंडलीय तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है।

    हरित गृह का सिद्धांत पृथ्वी के प्राकृतिक हरित गृह और ‘हरित गृह प्रभाव’ को समझने में मदद करता है। हरित गृह प्रभाव को देखने और समझने के लिए हम छोटा हरित गृह बना सकते हैं। इससे हम मानवजनित ‘हरित गृह प्रभाव’ को न्यूनतम करने के लिए अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को भी समझ सकते हैं।

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